Wednesday, July 9, 2008

कवितायेँ काम की

माया शरणम् गच्छामि !!

वाट लगा दी मुलायम की बीजेपी के बल्ब को फ्यूज किया है,
जो कल की हेड्लाइन थे उन्हें टीवी की ब्रेकिंग न्यूज़ किया है
माया ने सीता को कांशी बताकर राम को भी कन्फूज किया है
जिसने दलितों का किया मिसयूज उन्हें मिस ने अब यूज किया है।

मुझे भी दे दो आरक्षण .......


मोहब्बत में तेरे राइट से रांग हो गया हूँ,
एक दर्द भरा सहगल का सांग हो गया हूँ।
जालिम ज़माना दे दे अब प्यार में रियायत ,
दिल टूट गया यारो विकलांग हो गया हूँ/

ऐसे कीजिये प्यार......


प्यार करे तो अस करे, जस लोटा अरु डोर ।
आपन गला फंसाइ के ,पानी लावै बोर। ।

आधुनिक हिन्दी कवि सम्मलेन !

हिन्दी के सम्मलेन में बाहर लगे बैनर पे,
हिन्दी को ही एच आएन डी आई दिखा रहे।
भारत हिन्दोस्तान का नाम गुम हो रहा है
क्रिकेट का दल टीम इंडिया बता रहे।
मंच पर बैठे जो मोबाईल की घंटी बजी,
राग सारी सारी एक्स्क्युज मी का गा रहे।
कविता की पंक्तियों पे तालियाँ बजे जो कभी ,
श्रोताओं को फ़िर थैंक्यू थैंक्यू सुना रहे ।


कवि का फोन ....


हिन्दी के प्रसिद्द कवि मंच पर बैठे त्यौ ही,
फोन को लगा लिया था वाइब्रेट मोड़ पर ।
पत्नी के कल से बेहाल हुए कवीवर,
नंबर भी डायल किया मेरठ के कोड पर ।
कवि सकुचाये मुसकाये फ़िर सकुचाये
बोले डांट वरी आई हैव एस ऍम एस पावर ।
आई ऍम बिज़ी टू अटेंड कवि सम्मलेन ,
काल मी अगेन डार्लिंग आफ्टर वन आवर /
पंकज प्रसून
ंपर्क
खाद्य विष विज्ञान विभाग
भारतीय विष विज्ञान अनुसन्धान संस्थान लखनऊ
दूरभाष -०९३०५३५१४७६,०९४५१०५७४८६